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जेलों में बंद कैदियों की दशा और दिशा बदलने की बात हो जा फिर कामधेनु गौशाला सारे ही कार्य जीवों के भले के लिए है : राकेश कथूरिया


vishak
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पहली नज़र, कांगड़ा

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से पाँच दिवसीय भगवान शिव कथा का आयोजन हिमाचल प्रदेश के क्षेत्र गगल (काँगड़ा) में किया गया। तृतीय दिवस के कथा के मौका पर बतौर मुख्यातिथि शिरकत करते हुए हिमाचल प्रदेश यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के उपाध्यक्ष राकेश कथूरिया ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस मौका पर उन्होंने कहा कि इस संस्थान द्वारा जो पावन और नेक कार्य किए जा रहे हैं उससे समाज का भला हुआ है। उन्होंने कहा जेलों में बंद कैदियों की दशा और दिशा बदलने की बात हो जा फिर कामधेनु गौशाला सारे ही कार्य जीवों के भले के लिए है। इस मौके पर प्रसंग का वाचन करते हुए सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री गौरी भारती ने बताया कि हिमवान-मैना ने घोर तपस्या करके शक्तिरूपा को प्रसन्न किया और शक्तिरुपा से पुत्री के रूप में प्राप्त करने का वरदान प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि आज हमारे समाज में ऐसे लोगों की गणना बहुत कम है जो पुत्री को प्राप्त करने की कामना करते हैं। अधिकतर लोग यही चाहते हैं कि पुत्र ही प्राप्त हो क्योंकि पुत्र कमाएगा, माता-पिता की सेवा करेगा, वृद्ध अवस्था में हमारा सहारा बनेगा परंतु होता क्या है पुत्र वृद्ध माता-पिता को वृद्ध आश्रम में पहुँचा देते हैं।आज के समय में पुत्र को माता-पिता बोझ लगते हैं। साध्वी जी ने बताया कि आज हम पुत्र चाहते हैं और पुत्री को बोझ समझते हैं। समाज की सोच है कि पुत्री को पालना पड़ेगा फिर विवाह करके बहुत सारा धन लगाना पड़ेगा। इस लिए कौन इस बोझ को उठाए। यहां तक कि यदि पता चल जाए कि गर्भवती स्त्री के गर्भ में पुत्री है तो उस भ्रूण तक की हत्या कर दी जाती है ताकि हमारे घर में कन्या जन्म ही ना ले पाए। भारत भूमि पर सदैव देवियों का पूजन होता आया है। लोग नवरात्रों के दिनों में कन्याओं का पूजन करते हैं। साध्वी जी ने कहा कि दुर्भाग्यवश यह कहना पड़ रहा है कि हमनें कन्या को बोझ समझा उसके भीतर ममता, प्रेरणा, क्षमता और शक्तिरूप को नहीं जाना दुर्गा माता की पूजा करनेवाले भक्तजनों कन्याओं को स्वीकर करो और माँ के सच्चे पुजारी बन जाओ। कथा में अन्य साध्वियों द्वारा बहुत ही सुन्दर भजनों का गायन भी किया गया।

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